2 साल से ज्यादा देर की तो कोर्ट के चक्कर तय, जन्म-मृत्यु पंजीयन में बिलासपुर में बदला कड़ा नियम. . . नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: जन्म और मृत्यु पंजीयन के विधिक प्रविधानों में बड़े बदलाव किए गए हैं। अब दो वर्ष से अधिक विलंबित पंजीयन कराने के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा, जबकि एक से दो वर्ष पुराने मामलों में जिला दंडाधिकारी, एसडीएम या अधिकृत कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की अनुमति लेनी होगी। नई व्यवस्था से पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।जिला पंचायत सभागार में जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय द्वारा आयोजित कार्यशाला में जिलेभर के शासकीय व निजी अस्पतालों के आपरेटरों और रजिस्ट्रारों को नए नियमों की विस्तार से जानकारी दी गई। केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित संशोधन अधिनियम के तहत नागरिक पंजीयन प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और त्रुटिरहित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में नए नियमों के विधिवत लागू होने तक पुरानी व्यवस्था के तहत तहसीलदारों द्वारा लंबित प्रकरणों का तेजी से निराकरण कराया जा रहा है।अक्सर अस्पतालों और मैदानी स्तर पर डाटा एंट्री के दौरान नाम, जन्मतिथि व पते में वर्तनी संबंधी त्रुटियां सामने आती हैं, जिन्हें ठीक कराने के लिए नागरिकों को भटकना पड़ता है। कार्यशाला में मास्टर ट्रेनरों ने आनलाइन पोर्टल के संचालन की तकनीकी बारीकियों को समझाते हुए त्रुटिरहित प्रविष्टि के निर्देश दिए। साथ ही अपील और शास्ति संबंधी कानूनी प्रविधानों की जानकारी देते हुए तय समय-सीमा के भीतर प्रमाण पत्र जारी करने को कहा गया।यह भी पढ़ें- बिलासपुर के सिम्स अस्पताल में दवा वितरण सेंटर में जमकर विवाद, दादा के लिए लाइन में लगे पोते ने मचाया हंगामाअस्पताल स्तर पर ही होगी सीधी आनलाइन प्रविष्टिसिम्स, जिला अस्पताल, रेलवे व निजी अस्पतालों के कर्मियों को सीधे पोर्टल पर जन्म-मृत्यु का ब्योरा दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों द्वारा समय पर डाटा फीड करने से आम जनता को नगर निगम या जनपद पंचायतों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और निर्धारित समयावधि में प्रमाण पत्र उपलब्ध हो सकेगा।फर्जी प्रमाण पत्रों की रोकथाम के लिए कड़े नियमपुराने मामलों में फर्जीवाड़े की आशंका को खत्म करने के लिए ही न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की अनिवार्यता जोड़ी गई है। इसके अलावा एक से दो वर्ष के विलंबित मामलों में भी प्रशासनिक अधिकारियों की कड़ी जांच के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे, जिससे विधिक विवादों पर पूरी तरह विराम लग सके।जन्म-मृत्यु पंजीयन के विधिक संशोधनों को लेकर मैदानी अमले को प्रशिक्षित किया गया है। नए नियमों से व्यवस्था पारदर्शी होगी। सभी रजिस्ट्रारों और आपरेटरों को पोर्टल पर त्रुटिरहित एंट्री करने तथा समयबद्ध तरीके से प्रमाण पत्र जारी करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।एनके नेताम, जिला रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु बिलासपुर
खबर शेयर करें:
👁️1 पाठक
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: जन्म और मृत्यु पंजीयन के विधिक प्रविधानों में बड़े बदलाव किए गए हैं। अब दो वर्ष से अधिक विलंबित पंजीयन कराने के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा, जबकि एक से दो वर्ष पुराने मामलों में जिला दंडाधिकारी, एसडीएम या अधिकृत कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की अनुमति लेनी होगी। नई व्यवस्था से पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
जिला पंचायत सभागार में जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय द्वारा आयोजित कार्यशाला में जिलेभर के शासकीय व निजी अस्पतालों के आपरेटरों और रजिस्ट्रारों को नए नियमों की विस्तार से जानकारी दी गई। केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित संशोधन अधिनियम के तहत नागरिक पंजीयन प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और त्रुटिरहित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में नए नियमों के विधिवत लागू होने तक पुरानी व्यवस्था के तहत तहसीलदारों द्वारा लंबित प्रकरणों का तेजी से निराकरण कराया जा रहा है।
अक्सर अस्पतालों और मैदानी स्तर पर डाटा एंट्री के दौरान नाम, जन्मतिथि व पते में वर्तनी संबंधी त्रुटियां सामने आती हैं, जिन्हें ठीक कराने के लिए नागरिकों को भटकना पड़ता है। कार्यशाला में मास्टर ट्रेनरों ने आनलाइन पोर्टल के संचालन की तकनीकी बारीकियों को समझाते हुए त्रुटिरहित प्रविष्टि के निर्देश दिए। साथ ही अपील और शास्ति संबंधी कानूनी प्रविधानों की जानकारी देते हुए तय समय-सीमा के भीतर प्रमाण पत्र जारी करने को कहा गया।
यह भी पढ़ें- बिलासपुर के सिम्स अस्पताल में दवा वितरण सेंटर में जमकर विवाद, दादा के लिए लाइन में लगे पोते ने मचाया हंगामा
अस्पताल स्तर पर ही होगी सीधी आनलाइन प्रविष्टि
सिम्स, जिला अस्पताल, रेलवे व निजी अस्पतालों के कर्मियों को सीधे पोर्टल पर जन्म-मृत्यु का ब्योरा दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों द्वारा समय पर डाटा फीड करने से आम जनता को नगर निगम या जनपद पंचायतों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और निर्धारित समयावधि में प्रमाण पत्र उपलब्ध हो सकेगा।
फर्जी प्रमाण पत्रों की रोकथाम के लिए कड़े नियम
पुराने मामलों में फर्जीवाड़े की आशंका को खत्म करने के लिए ही न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की अनिवार्यता जोड़ी गई है। इसके अलावा एक से दो वर्ष के विलंबित मामलों में भी प्रशासनिक अधिकारियों की कड़ी जांच के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे, जिससे विधिक विवादों पर पूरी तरह विराम लग सके।
जन्म-मृत्यु पंजीयन के विधिक संशोधनों को लेकर मैदानी अमले को प्रशिक्षित किया गया है। नए नियमों से व्यवस्था पारदर्शी होगी। सभी रजिस्ट्रारों और आपरेटरों को पोर्टल पर त्रुटिरहित एंट्री करने तथा समयबद्ध तरीके से प्रमाण पत्र जारी करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
हेडलाइन और सार के साथ लिंक कॉपी करने के लिए नीचे बटन दबाएं
*2 साल से ज्यादा देर की तो कोर्ट के चक्कर तय, जन्म-मृत्यु पंजीयन में बिलासपुर में बदला कड़ा नियम*
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: जन्म और मृत्यु पंजीयन के विधिक प्रविधानों में बड़े बदलाव किए गए हैं। अब दो वर्ष से अधिक विलंबित पंजीयन कराने के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा, जबकि एक से दो वर्ष पुराने मामलों में जिला दंडाधिकारी, एसडीएम या अधिकृत कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की अनुमति लेनी होगी। नई व्यवस्था से पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।जिला पंचायत सभागार में जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय द्वारा आयोजित कार्यशाला में जिलेभर के शासकीय व निजी अस्पतालों के आपरेटरों और रजिस्ट्रारों को नए नियमों की विस्तार से जानकारी दी गई। केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित संशोधन अधिनियम...
*पुरे समाचार यहां पढ़ें*: https://ind24news.in/?p=7353
सौजन्य: *IND 24 न्यूज़*