जिस बेटी को खेल से दूर रखने की थी चिंता, उसी ने चीन में भारत की जीत पर लगाई मुहर. . . नईदुनिया न्यूज, बोड़ला : बोड़ला के एक किसान परिवार में कभी बेटी के हाकी खेलने पर उसके भविष्य की चिंता होती थी। माता-पिता चिंतित थे कि हाकी के चक्कर में बेटी की पढ़ाई प्रभावित न हो, लेकिन आज वही बेटी चीन की धरती पर भारत की जर्सी पहनकर गोल दाग रही हैं और अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में प्लेयर आफ द मैच बन रही है।यह सिर्फ गीता यादव के दो गोल की कहानी नहीं, बल्कि उस भरोसे की जीत है, जिसने आशंका को अवसर और अवसर को उपलब्धि में बदल दिया। जूनियर महिला एशिया कप में रविवार को मलेशिया के खिलाफ भारत की 11-1 की बड़ी जीत में गीता ने दो गोल कर अपने संघर्ष की सबसे चमकदार तस्वीर पेश की।बोड़ला के वार्ड क्रमांक 14 निवासी गीता यादव ने करीब आठ वर्ष पहले हाकी खेलना शुरू किया था। पिता गोपी यादव और मां कुमारी बाई खेती-किसानी से जुड़े हैं। सीमित संसाधनों वाले परिवार के सामने बेटी की पढ़ाई और खेल को लेकर स्वाभाविक चिंताएं थीं। परिवार को हाकी की दुनिया की जानकारी कम थी और शुरुआत में प्रशिक्षण के लिए बाहर भेजने को लेकर झिझक भी रही।महामारी के दौरान खेल गतिविधियां प्रभावित हुईं, मैदान सूने पड़े और प्रतियोगिताएं थम गईं। इसके बावजूद गीता ने हाकी से दूरी नहीं बनाई। बोड़ला में कोच हिमांशु चंद्रवंशी के मार्गदर्शन में अभ्यास जारी रखा। कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर प्रशिक्षण ने उनके खेल को और परिपक्व बनाया।जुलाई 2022 में गीता का चयन बिलासपुर स्पोर्ट्स एकेडमी के लिए हुआ। यहां बेहतर सुविधाओं के बीच उनके खेल में तेजी से निखार आया। वर्ष 2023 में वह देश के चुनिंदा 16 खिलाड़ियों में शामिल हुईं और उन्हें 6.20 लाख रुपये की स्कालरशिप मिली। राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन के बाद 88 खिलाड़ियों के इंडिया कैंप में जगह बनाई और फिर भारतीय जूनियर महिला टीम तक पहुंचीं।गीता की प्रतिभा को इंजीनियर शिव सिंह चौहान ने पहचाना। वर्ष 2019 में उन्होंने करीब छह महीने तक गीता के प्रशिक्षण का खर्च उठाया और रायपुर में अभ्यास की व्यवस्था कराई। इसके बाद गीता ने राजनांदगांव में लगभग एक वर्ष तक प्रशिक्षण लिया। बेहतर मार्गदर्शन और लगातार अभ्यास ने उनकी खेल क्षमता को नई ऊंचाई दी।गीता इससे पहले इंग्लैंड, बेल्जियम-नीदरलैंड और अर्जेंटीना के दौरों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। चीन में मलेशिया के खिलाफ दो गोल और प्लेयर आफ द मैच बनने से उन्होंने एक बार फिर अपनी क्षमता साबित की है।
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नईदुनिया न्यूज, बोड़ला : बोड़ला के एक किसान परिवार में कभी बेटी के हाकी खेलने पर उसके भविष्य की चिंता होती थी। माता-पिता चिंतित थे कि हाकी के चक्कर में बेटी की पढ़ाई प्रभावित न हो, लेकिन आज वही बेटी चीन की धरती पर भारत की जर्सी पहनकर गोल दाग रही हैं और अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में प्लेयर आफ द मैच बन रही है।
यह सिर्फ गीता यादव के दो गोल की कहानी नहीं, बल्कि उस भरोसे की जीत है, जिसने आशंका को अवसर और अवसर को उपलब्धि में बदल दिया। जूनियर महिला एशिया कप में रविवार को मलेशिया के खिलाफ भारत की 11-1 की बड़ी जीत में गीता ने दो गोल कर अपने संघर्ष की सबसे चमकदार तस्वीर पेश की।
बोड़ला के वार्ड क्रमांक 14 निवासी गीता यादव ने करीब आठ वर्ष पहले हाकी खेलना शुरू किया था। पिता गोपी यादव और मां कुमारी बाई खेती-किसानी से जुड़े हैं। सीमित संसाधनों वाले परिवार के सामने बेटी की पढ़ाई और खेल को लेकर स्वाभाविक चिंताएं थीं। परिवार को हाकी की दुनिया की जानकारी कम थी और शुरुआत में प्रशिक्षण के लिए बाहर भेजने को लेकर झिझक भी रही।
महामारी के दौरान खेल गतिविधियां प्रभावित हुईं, मैदान सूने पड़े और प्रतियोगिताएं थम गईं। इसके बावजूद गीता ने हाकी से दूरी नहीं बनाई। बोड़ला में कोच हिमांशु चंद्रवंशी के मार्गदर्शन में अभ्यास जारी रखा। कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर प्रशिक्षण ने उनके खेल को और परिपक्व बनाया।
जुलाई 2022 में गीता का चयन बिलासपुर स्पोर्ट्स एकेडमी के लिए हुआ। यहां बेहतर सुविधाओं के बीच उनके खेल में तेजी से निखार आया। वर्ष 2023 में वह देश के चुनिंदा 16 खिलाड़ियों में शामिल हुईं और उन्हें 6.20 लाख रुपये की स्कालरशिप मिली। राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन के बाद 88 खिलाड़ियों के इंडिया कैंप में जगह बनाई और फिर भारतीय जूनियर महिला टीम तक पहुंचीं।
गीता की प्रतिभा को इंजीनियर शिव सिंह चौहान ने पहचाना। वर्ष 2019 में उन्होंने करीब छह महीने तक गीता के प्रशिक्षण का खर्च उठाया और रायपुर में अभ्यास की व्यवस्था कराई। इसके बाद गीता ने राजनांदगांव में लगभग एक वर्ष तक प्रशिक्षण लिया। बेहतर मार्गदर्शन और लगातार अभ्यास ने उनकी खेल क्षमता को नई ऊंचाई दी।
गीता इससे पहले इंग्लैंड, बेल्जियम-नीदरलैंड और अर्जेंटीना के दौरों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। चीन में मलेशिया के खिलाफ दो गोल और प्लेयर आफ द मैच बनने से उन्होंने एक बार फिर अपनी क्षमता साबित की है।
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*जिस बेटी को खेल से दूर रखने की थी चिंता, उसी ने चीन में भारत की जीत पर लगाई मुहर*
नईदुनिया न्यूज, बोड़ला : बोड़ला के एक किसान परिवार में कभी बेटी के हाकी खेलने पर उसके भविष्य की चिंता होती थी। माता-पिता चिंतित थे कि हाकी के चक्कर में बेटी की पढ़ाई प्रभावित न हो, लेकिन आज वही बेटी चीन की धरती पर भारत की जर्सी पहनकर गोल दाग रही हैं और अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में प्लेयर आफ द मैच बन रही है।यह सिर्फ गीता यादव के दो गोल की कहानी नहीं, बल्कि उस भरोसे की जीत है, जिसने आशंका को अवसर और अवसर को उपलब्धि में बदल दिया। जूनियर महिला एशिया कप में रविवार को मलेशिया के खिलाफ भारत...
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सौजन्य: *IND 24 न्यूज़*