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CG High Court Order: सिर्फ शो-कॉज नोटिस के आधार पर नहीं रोक सकते पेंशन, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

September 10, 2026
5:20 AM
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नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। पौधारोपण कार्यों में कथित नुकसान की वसूली का हवाला देकर सेवानिवृत्त डिप्टी रेंजर के सेवानिवृत्ति लाभ रोकने के मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद जारी केवल शो-कॉज नोटिस अपने आप में सेवानिवृत्ति लाभ रोकने का वैध आधार नहीं बन सकता। यदि कर्मचारी के खिलाफ सेवानिवृत्ति के बाद विभागीय कार्रवाई करनी है तो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के नियम 9 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।

जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने बिलासपुर निवासी सेवानिवृत्त डिप्टी रेंजर अजय कुमार शर्मा की याचिका स्वीकार करते हुए विभाग को उनके बकाया सभी सेवानिवृत्ति लाभ 35 दिनों के भीतर जारी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि विलंबित भुगतान पर ब्याज की मांग के लिए याचिकाकर्ता सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अलग से अभ्यावेदन दे सकता है।

याचिकाकर्ता अजय कुमार शर्मा, 63 वर्ष, ने हाई कोर्ट में बताया कि वह वन विभाग से डिप्टी रेंजर के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनकी याचिका में ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण, जीपीएफ समेत सभी लंबित सेवानिवृत्ति लाभ जारी करने और देरी की अवधि पर 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने की मांग की गई थी।

सुनवाई के दौरान सामने आया कि याचिका लंबित रहने के दौरान कुछ सेवानिवृत्ति लाभ जारी कर दिए गए, लेकिन शेष राशि पौधारोपण कार्यों से जुड़े कथित नुकसान की वसूली के नाम पर रोककर रखी गई थी। विभाग ने इस संबंध में 26 दिसंबर 2025 को तीन अलग-अलग शो-कॉज नोटिस जारी किए थे। इन नोटिसों में सेवानिवृत्ति से पहले किए गए विभिन्न पौधारोपण कार्यों में कथित नुकसान को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था और राशि की वसूली प्रस्तावित की गई थी।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र पाली ने दलील दी कि तीनों नोटिस उनकी सेवानिवृत्ति के बाद जारी किए गए हैं। ऐसे में केवल नोटिस जारी करके उनके सेवानिवृत्ति लाभों को अनिश्चितकाल तक रोके रखना नियमों के विपरीत है। यदि सेवानिवृत्ति के बाद विभागीय कार्रवाई करनी है तो पेंशन नियमों के नियम 9 की अनिवार्य प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई में राज्य से यह जानकारी मांगी थी कि याचिकाकर्ता के खिलाफ विभागीय जांच के लिए सक्षम प्राधिकारी से कोई स्वीकृति या अनुमति ली गई है या नहीं और यदि जांच शुरू नहीं की गई है तो सेवानिवृत्ति लाभ क्यों रोके गए हैं। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि आज तक सक्षम प्राधिकारी से ऐसी कोई मंजूरी या स्वीकृति नहीं ली गई है और याचिकाकर्ता को कोई चार्जशीट भी जारी नहीं की गई है।

राज्य की ओर से उप शासकीय अधिवक्ता पूर्वा तिवारी ने बताया कि जीपीएफ और जीआईएस की राशि पहले ही जारी की जा चुकी है। याचिकाकर्ता को 90 प्रतिशत पेंशन और 90 प्रतिशत ग्रेच्युटी का भुगतान किया जा रहा है। शेष लाभ पौधारोपण कार्यों में कथित नुकसान और प्रस्तावित वसूली से संबंधित हैं। हालांकि हाई कोर्ट ने माना कि केवल आरोप लंबित होने या शो-कॉज नोटिस जारी होने को सेवानिवृत्त कर्मचारी के लाभ रोकने के लिए अनिश्चितकालीन आधार नहीं बनाया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि मामले में कथित अनियमितताएं याचिकाकर्ता की सेवानिवृत्ति से काफी पहले की अवधि से संबंधित हैं। इसके बावजूद विभाग ने न तो सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक स्वीकृति प्राप्त की और न ही चार्जशीट जारी कर कोई विभागीय कार्यवाही शुरू की। ऐसी स्थिति में 26 दिसंबर 2025 के शो-कॉज नोटिस अपने आप में सेवानिवृत्ति लाभ रोकने का कानूनी आधार नहीं बन सकते।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपों की जांच या विभागीय कार्रवाई के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जा सकती है, लेकिन सिर्फ नोटिस के आधार पर कर्मचारी के देय सेवानिवृत्ति लाभ रोके नहीं जा सकते।

हाई कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को जो भी सेवानिवृत्ति लाभ अब तक जारी नहीं किए गए हैं, उनका भुगतान आदेश की प्रति प्राप्त होने के 35 दिनों के भीतर किया जाए।

हालांकि ब्याज के रूप में 18 प्रतिशत की मांग पर हाई कोर्ट ने कोई सीधा भुगतान आदेश नहीं दिया। कोर्ट ने अजय कुमार शर्मा को इस संबंध में सक्षम प्राधिकारी के समक्ष उचित अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी है। प्राधिकारी को उस अभ्यावेदन पर कानून के अनुसार विचार करना होगा।

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लेखक:

IND24 न्यूज़ के लिए वरिष्ठ पत्रकार।

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