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एक पत्थर से बना पूरा मंदिर, मंदसौर के धर्मराजेश्वर की कहानी; जो नई टेक्नोलॉजी को भी देता है चुनौती

June 5, 2026
1:27 PM
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आलोक शर्मा, नईदुनिया मंदसौर। महाराष्ट्र के अजंता-एलोरा स्थित कैलाश मंदिर की ख्याति देश-दुनिया में है, लेकिन मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित धर्मराजेश्वर मंदिर आज भी अपेक्षित पहचान का इंतजार कर रहा है। शामगढ़ तहसील के चंदवासा गांव के समीप स्थित यह मंदिर अपनी निर्माण शैली, स्थापत्य कला और धार्मिक मान्यताओं के कारण किसी आश्चर्य से कम नहीं है।

इसकी तुलना एलोरा के कैलाश मंदिर से की जाती है, क्योंकि यह भी एकाश्म (मोनोलिथिक) शैली में निर्मित है। करीब आठवीं शताब्दी में निर्मित धर्मराजेश्वर मंदिर को नौ मीटर गहरी चट्टान को ऊपर से नीचे की ओर तराशकर बनाया गया है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके निर्माण में कहीं भी किसी प्रकार का जोड़ नहीं है।

पूरा मंदिर एक ही विशाल शिला को काटकर तैयार किया गया है। सामान्य तौर पर किसी भी भवन या मंदिर का निर्माण नींव से शुरू होता है, लेकिन धर्मराजेश्वर मंदिर इसके ठीक विपरीत ऊपर से नीचे की ओर तराशा गया है। यही कारण है कि यह मंदिर आज भी आधुनिक इंजीनियरिंग और स्थापत्य कला के विशेषज्ञों के लिए शोध का विषय बना हुआ है। मंदिर को लेकर एक रोचक किंवदंती भी प्रचलित है।

मान्यता है कि पांडव पुत्र भीमसेन ने अज्ञातवास के दौरान इसे एक ही रात में बनाने का संकल्प लिया था। कहा जाता है कि चंबल नदी से विवाह प्रस्ताव स्वीकार कराने के लिए यह शर्त रखी गई थी कि यदि प्रातः चार बजे से पहले मंदिर का निर्माण पूरा हो जाएगा तो प्रस्ताव मंजूर कर लिया जाएगा। किंतु निर्माण पूरा होने से पहले ही मुर्गे के बोलने से रात समाप्त मान ली गई और भीमसेन शर्त हार गए।

धर्मराजेश्‍वर क्षेत्र में स्थित बौद्ध गुफाएं।

धर्मराजेश्वर मंदिर परिसर लगभग 1415 वर्गमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां एक बड़े मंदिर के अलावा सात छोटे मंदिर भी हैं। परिसर में अनेक आकर्षक शिल्पकृतियां और नक्काशी देखने को मिलती है। धार्मिक मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु और भगवान शिव का दिव्य मिलन होता है। महाशिवरात्रि पर यहां तीन दिवसीय मेले का आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

मंदिर की एक और विशेषता यह है कि जमीन के भीतर बने होने के बावजूद सूर्य की पहली किरण गर्भगृह तक पहुंचती है। धर्मराजेश्वर क्षेत्र केवल मंदिर तक सीमित नहीं है। यहां 200 छोटी-बड़ी गुफाएं भी मौजूद हैं।

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लेखक:

Ankit Sharma

IND24 न्यूज़ के लिए वरिष्ठ पत्रकार।

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