कवर्धा में घर से शुरू किया शिक्षा के उजियारे का सफर, शासन ने दिए 10 बोनस अंक. . . भावेश मिश्रा, नईदुनिया, कवर्धा। जिस उम्र में अधिकांश विद्यार्थी केवल अपनी बोर्ड परीक्षाओं और भविष्य की तैयारियों में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में कवर्धा जिले के पंडरिया विकासखंड अंतर्गत आने वाले सिरमा डबरी गांव की छात्रा करिश्मा साहू ने समाज सेवा की एक अनूठी मिसाल पेश की है। बारहवीं कक्षा में अध्ययन के दौरान करिश्मा ने अपनी व्यस्तचर्या से रोजाना एक से दो घंटे का समय निकालकर गांव के दस से अधिक ऐसे लोगों को बुनियादी शिक्षा प्रदान की, जो कभी स्कूल नहीं जा सके थे। शासन ने इस सेवा के लिए उसे दस बोनस अंक भी दिए।करिश्मा ने अपने ही घर से इस नेक मुहिम की शुरुआत की। उन्होंने अपने दादा-दादी, चाचा-चाची के अलावा गांव के उपसरपंच और अन्य बुजुर्गों को पूरी तल्लीनता से अक्षर ज्ञान कराया।उनकी इस अनूठी पाठशाला में ग्रामीण शामिल हुए। साक्षरता के इस सफर में उन्होंने किसी निश्चित कमरे या औपचारिक समय को बाधा नहीं बनने दिया, बल्कि ग्रामीणों की सुविधा के अनुसार कभी घर तो कभी गांव के अलग-अलग मोहल्लों में बैठकर शिक्षा दी।करिश्मा के पिता संतोष साहू एक शिक्षक हैं और उनकी माता गृहिणी हैं। घर में शैक्षणिक माहौल मिलने के कारण करिश्मा के मन में समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना बचपन से ही जागृत हो गई थी। उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत जब स्कूली विद्यार्थियों को निरक्षरों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया, तो करिश्मा ने बढ़-चढ़कर इसमें हिस्सा लिया।उनके इस समर्पित प्रयास और मूल्यांकन परीक्षा में उनके शिष्यों के सफल होने पर शासन ने उन्हें दस बोनस अंक प्रदान कर सम्मानित भी किया। बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्तमान में करिश्मा दुर्ग में रहकर अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।
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भावेश मिश्रा, नईदुनिया, कवर्धा। जिस उम्र में अधिकांश विद्यार्थी केवल अपनी बोर्ड परीक्षाओं और भविष्य की तैयारियों में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में कवर्धा जिले के पंडरिया विकासखंड अंतर्गत आने वाले सिरमा डबरी गांव की छात्रा करिश्मा साहू ने समाज सेवा की एक अनूठी मिसाल पेश की है। बारहवीं कक्षा में अध्ययन के दौरान करिश्मा ने अपनी व्यस्तचर्या से रोजाना एक से दो घंटे का समय निकालकर गांव के दस से अधिक ऐसे लोगों को बुनियादी शिक्षा प्रदान की, जो कभी स्कूल नहीं जा सके थे। शासन ने इस सेवा के लिए उसे दस बोनस अंक भी दिए।
करिश्मा ने अपने ही घर से इस नेक मुहिम की शुरुआत की। उन्होंने अपने दादा-दादी, चाचा-चाची के अलावा गांव के उपसरपंच और अन्य बुजुर्गों को पूरी तल्लीनता से अक्षर ज्ञान कराया।
उनकी इस अनूठी पाठशाला में ग्रामीण शामिल हुए। साक्षरता के इस सफर में उन्होंने किसी निश्चित कमरे या औपचारिक समय को बाधा नहीं बनने दिया, बल्कि ग्रामीणों की सुविधा के अनुसार कभी घर तो कभी गांव के अलग-अलग मोहल्लों में बैठकर शिक्षा दी।
करिश्मा के पिता संतोष साहू एक शिक्षक हैं और उनकी माता गृहिणी हैं। घर में शैक्षणिक माहौल मिलने के कारण करिश्मा के मन में समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना बचपन से ही जागृत हो गई थी। उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत जब स्कूली विद्यार्थियों को निरक्षरों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया, तो करिश्मा ने बढ़-चढ़कर इसमें हिस्सा लिया।
उनके इस समर्पित प्रयास और मूल्यांकन परीक्षा में उनके शिष्यों के सफल होने पर शासन ने उन्हें दस बोनस अंक प्रदान कर सम्मानित भी किया। बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्तमान में करिश्मा दुर्ग में रहकर अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।
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*कवर्धा में घर से शुरू किया शिक्षा के उजियारे का सफर, शासन ने दिए 10 बोनस अंक*
भावेश मिश्रा, नईदुनिया, कवर्धा। जिस उम्र में अधिकांश विद्यार्थी केवल अपनी बोर्ड परीक्षाओं और भविष्य की तैयारियों में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में कवर्धा जिले के पंडरिया विकासखंड अंतर्गत आने वाले सिरमा डबरी गांव की छात्रा करिश्मा साहू ने समाज सेवा की एक अनूठी मिसाल पेश की है। बारहवीं कक्षा में अध्ययन के दौरान करिश्मा ने अपनी व्यस्तचर्या से रोजाना एक से दो घंटे का समय निकालकर गांव के दस से अधिक ऐसे लोगों को बुनियादी शिक्षा प्रदान की, जो कभी स्कूल नहीं जा सके थे। शासन ने इस सेवा के लिए उसे दस बोनस अंक भी दिए।करिश्मा ने...
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