शरिया कोर्ट पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की दोटूक, निजी संस्था नहीं कर सकती तलाक का फैसला. . . नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मुस्लिम महिला के वैवाहिक अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि कोई निजी धार्मिक संस्था या स्वयं को शरिया कोर्ट बताने वाला संगठन कानून से स्थापित अदालत का दर्जा नहीं प्राप्त कर सकता। ऐसी संस्थाएं न तो किसी महिला के वैवाहिक दर्जे का न्यायिक निर्धारण कर सकती हैं और न ही विवाह विच्छेद की कानूनी घोषणा कर सकती हैं।कोर्ट ने रायपुर के इदारा-ए-शरिया इस्लामी कोर्ट द्वारा 18 जनवरी 2022 को जारी उस आदेश को कानूनी अधिकार से रहित घोषित कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता महिला को उसके पति से तलाकशुदा बताया गया था।याचिकाकर्ता ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ उत्पीड़न, क्रूरता और दुर्व्यवहार की शिकायत की थी। वन स्टाप सखी सेंटर में काउंसिलिंग भी हुई, लेकिन विवाद का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद सात अक्टूबर 2021 को उन्होंने पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत की। महिला थाना रायपुर में एक नवंबर 2021 को एफआइआर दर्ज की गई, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए और 34 के तहत अपराध दर्ज हुआ।यह भी पढ़ें- रायपुर में महिला की बेरहमी से हत्या, सिर और चेहरे पर सीमेंट पोल से वार, खून से सना टुकड़ा मिला
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नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मुस्लिम महिला के वैवाहिक अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि कोई निजी धार्मिक संस्था या स्वयं को शरिया कोर्ट बताने वाला संगठन कानून से स्थापित अदालत का दर्जा नहीं प्राप्त कर सकता। ऐसी संस्थाएं न तो किसी महिला के वैवाहिक दर्जे का न्यायिक निर्धारण कर सकती हैं और न ही विवाह विच्छेद की कानूनी घोषणा कर सकती हैं।
कोर्ट ने रायपुर के इदारा-ए-शरिया इस्लामी कोर्ट द्वारा 18 जनवरी 2022 को जारी उस आदेश को कानूनी अधिकार से रहित घोषित कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता महिला को उसके पति से तलाकशुदा बताया गया था।
याचिकाकर्ता ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ उत्पीड़न, क्रूरता और दुर्व्यवहार की शिकायत की थी। वन स्टाप सखी सेंटर में काउंसिलिंग भी हुई, लेकिन विवाद का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद सात अक्टूबर 2021 को उन्होंने पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत की। महिला थाना रायपुर में एक नवंबर 2021 को एफआइआर दर्ज की गई, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए और 34 के तहत अपराध दर्ज हुआ।
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*शरिया कोर्ट पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की दोटूक, निजी संस्था नहीं कर सकती तलाक का फैसला*
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मुस्लिम महिला के वैवाहिक अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि कोई निजी धार्मिक संस्था या स्वयं को शरिया कोर्ट बताने वाला संगठन कानून से स्थापित अदालत का दर्जा नहीं प्राप्त कर सकता। ऐसी संस्थाएं न तो किसी महिला के वैवाहिक दर्जे का न्यायिक निर्धारण कर सकती हैं और न ही विवाह विच्छेद की कानूनी घोषणा कर सकती हैं।कोर्ट ने रायपुर के इदारा-ए-शरिया इस्लामी कोर्ट द्वारा 18 जनवरी 2022 को जारी उस आदेश को कानूनी अधिकार से रहित घोषित कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता महिला को उसके पति से तलाकशुदा...
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सौजन्य: *IND 24 न्यूज़*