डोंगरगढ़-कटघोरा रेल लाइन: 295 किमी के सफर में 27 स्टेशन, छत्तीसगढ़ के विकास को मिलेगी नई रफ्तार. . . रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के रेल नेटवर्क के विस्तार की बहुप्रतीक्षित योजना डोंगरगढ़-कटघोरा नई रेल लाइन एक बार फिर चर्चा में है। करीब 295 किलोमीटर लंबी इस प्रस्तावित रेल परियोजना में 27 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित हैं। यह रेल कॉरिडोर डोंगरगढ़ से शुरू होकर कबीरधाम, मुंगेली और बिलासपुर क्षेत्र से होते हुए कटघोरा तक पहुंचेगा। परियोजना को छत्तीसगढ़ के मध्य और उत्तर हिस्से को बेहतर रेल कनेक्टिविटी से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
नोट: उपलब्ध जानकारी के अनुसार 27 स्टेशन अभी प्रस्तावित हैं। इसलिए इन्हें चालू रेलवे स्टेशन के रूप में नहीं, बल्कि परियोजना के प्रस्तावित स्टेशनों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
295 किमी के रेल कॉरिडोर में 27 स्टेशन
प्रस्तावित रूट में कुल 27 स्टेशन रखे गए हैं। उपलब्ध परियोजना विवरण और तस्वीर के अनुसार स्टेशन क्रम इस प्रकार है—
डोंगरगढ़
बेलगांव
घोघेबोडरी
प्रकाशपुर
बैरागढ़
घुचवान
मुरई
गंडई
जंगालपुर
धनगांव
धनौली
कवर्धी
बोरेदुली
सोमनापुर
कंवलपुर
मुंगेली
कोसमा
तखतपुर
खमरिया
गनियारी
लामरे
रतनपुर
नेवसा
बेलतरा
करतला
जमानीमुड़ा
कटघोरा
डोंगरगढ़ से कटघोरा तक जुड़ेगा बड़ा क्षेत्र
इस रेल लाइन का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि डोंगरगढ़, कबीरधाम, मुंगेली, बिलासपुर और कोरबा क्षेत्र के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा। परियोजना के पुराने विवरणों के मुताबिक लाइन की लंबाई करीब 294.53 किलोमीटर है, जिसे सामान्य तौर पर 295 किमी के रूप में बताया जाता है।
रेल मंत्रालय से परियोजना को मंजूरी मिलने की जानकारी वर्ष 2021 में सामने आई थी। उस समय परियोजना की अनुमानित लागत करीब 4,021 करोड़ रुपये बताई गई थी और निर्माण एजेंसी के रूप में छत्तीसगढ़ रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड का उल्लेख किया गया था।
2024 में 300 करोड़ रुपये की स्वीकृति
परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में अक्टूबर 2024 में भी महत्वपूर्ण कदम सामने आया। छत्तीसगढ़ खनिज विकास निधि सलाहकार समिति की बैठक में डोंगरगढ़-कबीरधाम-मुंगेली-कटघोरा रेलमार्ग के लिए 300 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। यह राशि भू-अर्जन और प्रारंभिक निर्माण संबंधी कार्यों के लिए छत्तीसगढ़ रेल कॉरपोरेशन को दिए जाने की बात कही गई थी।
कबीरधाम के गांवों को भी मिलेगा फायदा
परियोजना के पुराने विवरणों के अनुसार रेल लाइन कबीरधाम जिले के करीब 50 गांवों से होकर गुजरने की योजना है। लोहारा, कवर्धा और पंडरिया तहसीलों के विभिन्न गांवों को इससे जोड़ने की योजना बताई गई थी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों के लिए बड़े शहरों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
यात्रियों के साथ माल परिवहन के लिए भी अहम
यह रेल लाइन केवल यात्री परिवहन के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है। कोयला और अन्य खनिजों के परिवहन के लिए भी यह कॉरिडोर उपयोगी साबित हो सकता है। कटघोरा और कोरबा क्षेत्र की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था को डोंगरगढ़ तथा मध्य छत्तीसगढ़ के रेल नेटवर्क से बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है।
परियोजना से जुड़े पुराने विवरणों में इसे सिंगल लाइन के रूप में विकसित किए जाने और मालगाड़ियों के साथ यात्री ट्रेनों के संचालन की संभावना बताई गई थी।
व्यापार और रोजगार को मिल सकती है नई दिशा
रेल कनेक्टिविटी बढ़ने से प्रस्तावित स्टेशन क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों, परिवहन, वेयरहाउसिंग, कृषि उपज के परिवहन और छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। खासकर मुंगेली, कवर्धा और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए बेहतर रेल संपर्क स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद कर सकता है।
पर्यटन को भी मिलेगा फायदा
डोंगरगढ़ धार्मिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है। नई रेल कनेक्टिविटी से डोंगरगढ़ और आसपास के पर्यटन स्थलों तक पहुंच और आसान हो सकती है। दूसरी ओर, परियोजना से जुड़े ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में भी पर्यटन गतिविधियों को विकसित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
क्या है परियोजना की मौजूदा तस्वीर?
डोंगरगढ़-कटघोरा रेल परियोजना वर्षों से प्रस्तावित और स्वीकृति प्रक्रिया से गुजरती रही है। 2018 में करीब 294.53 किमी लंबी ब्रॉडगेज विद्युतीकृत रेल लाइन को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद परियोजना में विभिन्न स्तरों पर भूमि अधिग्रहण और वित्तीय स्वीकृतियों से जुड़े कदम उठाए गए।
अक्टूबर 2024 में 300 करोड़ रुपये की स्वीकृति के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में वित्तीय आधार मजबूत हुआ। हालांकि, 27 प्रस्तावित स्टेशनों पर नियमित रेल सेवा शुरू होने या पूरी 295 किमी लाइन के निर्माण की अंतिम समयसीमा की पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं होती। इसलिए इस समय इसे निर्माणाधीन/चालू रेल सेवा बताने के बजाय प्रस्तावित एवं स्वीकृत परियोजना के रूप में प्रस्तुत करना अधिक उचित होगा।
छत्तीसगढ़ के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रेल लाइन?
295 किमी लंबा प्रस्तावित रेल कॉरिडोर
27 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित
डोंगरगढ़ से कटघोरा तक सीधा रेल संपर्क
कबीरधाम और मुंगेली जैसे क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी
कोरबा क्षेत्र के खनिज परिवहन को संभावित लाभ
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और व्यापार के अवसर
कृषि एवं स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद
यात्री और माल परिवहन दोनों के लिए संभावित महत्वपूर्ण कॉरिडोर
निष्कर्ष
डोंगरगढ़-कटघोरा रेल लाइन छत्तीसगढ़ के लिए सिर्फ एक नई रेल पटरी नहीं, बल्कि मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाला संभावित आर्थिक कॉरिडोर है। 295 किमी की दूरी में 27 प्रस्तावित स्टेशनों के जरिए यह परियोजना कई जिलों और ग्रामीण इलाकों को रेल नेटवर्क से जोड़ सकती है। भूमि अधिग्रहण, निर्माण और वित्तीय प्रक्रिया के अगले चरण इस परियोजना की वास्तविक प्रगति तय करेंगे। 2024 में 300 करोड़ रुपये की स्वीकृति के बाद अब लोगों की निगाहें इस बात पर हैं कि जमीन पर निर्माण कार्य कितनी तेजी से आगे बढ़ता है और ट्रेन संचालन का लक्ष्य कब निर्धारित होता है।
— IND24NEWS.IN के लिए विशेष रिपोर्ट
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रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के रेल नेटवर्क के विस्तार की बहुप्रतीक्षित योजना डोंगरगढ़-कटघोरा नई रेल लाइन एक बार फिर चर्चा में है। करीब 295 किलोमीटर लंबी इस प्रस्तावित रेल परियोजना में 27 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित हैं। यह रेल कॉरिडोर डोंगरगढ़ से शुरू होकर कबीरधाम, मुंगेली और बिलासपुर क्षेत्र से होते हुए कटघोरा तक पहुंचेगा। परियोजना को छत्तीसगढ़ के मध्य और उत्तर हिस्से को बेहतर रेल कनेक्टिविटी से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
नोट: उपलब्ध जानकारी के अनुसार 27 स्टेशन अभी प्रस्तावित हैं। इसलिए इन्हें चालू रेलवे स्टेशन के रूप में नहीं, बल्कि परियोजना के प्रस्तावित स्टेशनों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
295 किमी के रेल कॉरिडोर में 27 स्टेशन
प्रस्तावित रूट में कुल 27 स्टेशन रखे गए हैं। उपलब्ध परियोजना विवरण और तस्वीर के अनुसार स्टेशन क्रम इस प्रकार है—
डोंगरगढ़
बेलगांव
घोघेबोडरी
प्रकाशपुर
बैरागढ़
घुचवान
मुरई
गंडई
जंगालपुर
धनगांव
धनौली
कवर्धी
बोरेदुली
सोमनापुर
कंवलपुर
मुंगेली
कोसमा
तखतपुर
खमरिया
गनियारी
लामरे
रतनपुर
नेवसा
बेलतरा
करतला
जमानीमुड़ा
कटघोरा
डोंगरगढ़ से कटघोरा तक जुड़ेगा बड़ा क्षेत्र
इस रेल लाइन का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि डोंगरगढ़, कबीरधाम, मुंगेली, बिलासपुर और कोरबा क्षेत्र के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा। परियोजना के पुराने विवरणों के मुताबिक लाइन की लंबाई करीब 294.53 किलोमीटर है, जिसे सामान्य तौर पर 295 किमी के रूप में बताया जाता है।
रेल मंत्रालय से परियोजना को मंजूरी मिलने की जानकारी वर्ष 2021 में सामने आई थी। उस समय परियोजना की अनुमानित लागत करीब 4,021 करोड़ रुपये बताई गई थी और निर्माण एजेंसी के रूप में छत्तीसगढ़ रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड का उल्लेख किया गया था।
2024 में 300 करोड़ रुपये की स्वीकृति
परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में अक्टूबर 2024 में भी महत्वपूर्ण कदम सामने आया। छत्तीसगढ़ खनिज विकास निधि सलाहकार समिति की बैठक में डोंगरगढ़-कबीरधाम-मुंगेली-कटघोरा रेलमार्ग के लिए 300 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। यह राशि भू-अर्जन और प्रारंभिक निर्माण संबंधी कार्यों के लिए छत्तीसगढ़ रेल कॉरपोरेशन को दिए जाने की बात कही गई थी।
कबीरधाम के गांवों को भी मिलेगा फायदा
परियोजना के पुराने विवरणों के अनुसार रेल लाइन कबीरधाम जिले के करीब 50 गांवों से होकर गुजरने की योजना है। लोहारा, कवर्धा और पंडरिया तहसीलों के विभिन्न गांवों को इससे जोड़ने की योजना बताई गई थी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों के लिए बड़े शहरों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
यात्रियों के साथ माल परिवहन के लिए भी अहम
यह रेल लाइन केवल यात्री परिवहन के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है। कोयला और अन्य खनिजों के परिवहन के लिए भी यह कॉरिडोर उपयोगी साबित हो सकता है। कटघोरा और कोरबा क्षेत्र की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था को डोंगरगढ़ तथा मध्य छत्तीसगढ़ के रेल नेटवर्क से बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है।
परियोजना से जुड़े पुराने विवरणों में इसे सिंगल लाइन के रूप में विकसित किए जाने और मालगाड़ियों के साथ यात्री ट्रेनों के संचालन की संभावना बताई गई थी।
व्यापार और रोजगार को मिल सकती है नई दिशा
रेल कनेक्टिविटी बढ़ने से प्रस्तावित स्टेशन क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों, परिवहन, वेयरहाउसिंग, कृषि उपज के परिवहन और छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। खासकर मुंगेली, कवर्धा और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए बेहतर रेल संपर्क स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद कर सकता है।
पर्यटन को भी मिलेगा फायदा
डोंगरगढ़ धार्मिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है। नई रेल कनेक्टिविटी से डोंगरगढ़ और आसपास के पर्यटन स्थलों तक पहुंच और आसान हो सकती है। दूसरी ओर, परियोजना से जुड़े ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में भी पर्यटन गतिविधियों को विकसित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
क्या है परियोजना की मौजूदा तस्वीर?
डोंगरगढ़-कटघोरा रेल परियोजना वर्षों से प्रस्तावित और स्वीकृति प्रक्रिया से गुजरती रही है। 2018 में करीब 294.53 किमी लंबी ब्रॉडगेज विद्युतीकृत रेल लाइन को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद परियोजना में विभिन्न स्तरों पर भूमि अधिग्रहण और वित्तीय स्वीकृतियों से जुड़े कदम उठाए गए।
अक्टूबर 2024 में 300 करोड़ रुपये की स्वीकृति के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में वित्तीय आधार मजबूत हुआ। हालांकि, 27 प्रस्तावित स्टेशनों पर नियमित रेल सेवा शुरू होने या पूरी 295 किमी लाइन के निर्माण की अंतिम समयसीमा की पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं होती। इसलिए इस समय इसे निर्माणाधीन/चालू रेल सेवा बताने के बजाय प्रस्तावित एवं स्वीकृत परियोजना के रूप में प्रस्तुत करना अधिक उचित होगा।
छत्तीसगढ़ के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रेल लाइन?
295 किमी लंबा प्रस्तावित रेल कॉरिडोर
27 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित
डोंगरगढ़ से कटघोरा तक सीधा रेल संपर्क
कबीरधाम और मुंगेली जैसे क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी
कोरबा क्षेत्र के खनिज परिवहन को संभावित लाभ
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और व्यापार के अवसर
कृषि एवं स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद
यात्री और माल परिवहन दोनों के लिए संभावित महत्वपूर्ण कॉरिडोर
निष्कर्ष
डोंगरगढ़-कटघोरा रेल लाइन छत्तीसगढ़ के लिए सिर्फ एक नई रेल पटरी नहीं, बल्कि मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाला संभावित आर्थिक कॉरिडोर है। 295 किमी की दूरी में 27 प्रस्तावित स्टेशनों के जरिए यह परियोजना कई जिलों और ग्रामीण इलाकों को रेल नेटवर्क से जोड़ सकती है। भूमि अधिग्रहण, निर्माण और वित्तीय प्रक्रिया के अगले चरण इस परियोजना की वास्तविक प्रगति तय करेंगे। 2024 में 300 करोड़ रुपये की स्वीकृति के बाद अब लोगों की निगाहें इस बात पर हैं कि जमीन पर निर्माण कार्य कितनी तेजी से आगे बढ़ता है और ट्रेन संचालन का लक्ष्य कब निर्धारित होता है।
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*डोंगरगढ़-कटघोरा रेल लाइन: 295 किमी के सफर में 27 स्टेशन, छत्तीसगढ़ के विकास को मिलेगी नई रफ्तार*
रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के रेल नेटवर्क के विस्तार की बहुप्रतीक्षित योजना डोंगरगढ़-कटघोरा नई रेल लाइन एक बार फिर चर्चा में है। करीब 295 किलोमीटर लंबी इस प्रस्तावित रेल परियोजना में 27 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित हैं। यह रेल कॉरिडोर डोंगरगढ़ से शुरू होकर कबीरधाम, मुंगेली और बिलासपुर क्षेत्र से होते हुए कटघोरा तक पहुंचेगा। परियोजना को छत्तीसगढ़ के मध्य और उत्तर हिस्से को बेहतर रेल कनेक्टिविटी से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। नोट: उपलब्ध जानकारी के अनुसार 27 स्टेशन अभी प्रस्तावित हैं। इसलिए इन्हें चालू रेलवे स्टेशन के रूप में नहीं, बल्कि परियोजना के प्रस्तावित स्टेशनों के रूप में...
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