BRAKING
• 2011 में रिश्ता टूटा, 2026 में तलाक, अब दूसरी शादी... CM उमर अब्दुल्ला की 15 साल बाद पूरी हुई अधूरी कहानी• Weekly Rashifal 1-7 November 2026: कन्‍या, तुला और कुंभ राशि के लिए हर जगह सफलता, आपके लिए कैसा रहेगा यह सप्‍ताह• CG हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: विदेश से MBBS करने वाले डॉक्टरों को नहीं मिलेगी इंटर्नशिप फीस की वापसी• CG Foundation Day: 11 सीटों के वादे पर बना था छत्तीसगढ़, 26 साल बाद भी जनता निभा रही 'अटल' से किया वादा• Punjab Chunav: AAP ने की 40 प्रत्याशियों की घोषणा, पहली लिस्ट में किसी भी कैबिनेट मंत्री का नाम नहीं• IND vs NZ: आखिरी टी-20 में इस धांसू ऑलराउंडर को मिलेगा मौका, ऑकलैंड की शर्मनाक हार के बाद बदलाव संभव• घर बैठे ECG की निगरानी करेगा पोर्टेबल डिवाइस, एआई बताएगा हार्ट में असामान्य बदलाव• Goa Naraka Chaturdashi: क्‍या है गोवा की मशहूर नरक चतुर्दशी जो जोरशोर से मनती है, राक्षस के पुतलों से पट जाती है सड़कें• मुर्गा जल्दी देने की बात पर भड़का कसाई, जिस हथियार से काटता था वहीं युवक के पैर में दे मारा• बिलासपुर में साइबर ठगी का नया पैंतरा, चालान देखने के चक्कर में MR के खाते से उड़े 99 हजार• छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में सारंग एयर शो: किस रूट से पहुंचें, कहां करें पार्किंग, जानिए पूरी डिटेल• Vivah Muhurt: शादी-विवाह पर लगा विराम, अब 145 दिनों बाद फिर गूंजेंगी शहनाइयां• 5 राशियों के लिए अच्‍छे समय का संकेत, देवगुरु बृहस्पति आज कर्क से सिंह राशि में करेंगे गोचर• बिलासपुर के राजेंद्र नगर चौक इलाके की दुकान में लगी आग, दुकानदारों ने खुद ही फैलने से रोकी• रायपुर में नशे में धुत युवकों ने कार से मचाया कहर, बुजुर्ग की मौत; महिला और दो बच्चे घायल

रामायण में एक ऐसी स्त्री, जिनकी तपोशक्ति ने वानर सेना को मायावी गुफा से निकालकर पहुंचाया था समुद्र तट

October 28, 2026
9:23 PM
खबर सुनिए
Long-Read AI Assistant
खबर शेयर करें:
👁️7 पाठक

धर्म डेस्क। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत और हनुमान जी के शौर्य और चरित्र से हर कोई परिचित है। परंतु इस महाकाव्य में कुछ ऐसे दिव्य और अल्पचर्चित पात्र भी हैं, जिनके निर्णायक योगदान के बिना माता सीता की खोज की दिशा तय होना असंभव था। इन्हीं में से एक अत्यंत रहस्यमयी, तपोनिष्ठ और सिद्ध चरित्र हैं- तपस्विनी स्वयंप्रभा।

रामायण के 'किष्किंधा कांड' में वर्णित यह प्रसंग दर्शाता है कि किस प्रकार एक तपस्विनी की योग शक्ति ने पूरी वानर सेना को जीवनदान दिया और उन्हें सीधे लक्ष्य के द्वार तक पहुंचा दिया।

रामायण के अनुसार, जब लंकापति रावण माता सीता का हरण कर ले गया, तब किष्किंधा नरेश सुग्रीव ने चारों दिशाओं में वानरों के दल भेजे। दक्षिण दिशा के सबसे महत्वपूर्ण दल का नेतृत्व युवराज अंगद कर रहे थे, जिसमें हनुमान जी, जाम्बवंत, नल और नील जैसे महारथी शामिल थे।

विंध्याचल के बीहड़ जंगलों में कई दिनों तक भटकने के बाद वानर दल भूख और प्यास से अत्यंत व्याकुल हो गया। जल की तलाश करते हुए उन्हें एक विशाल, घोर अंधकारमय गुफा दिखाई दी, जिसे 'ऋक्षबिल' कहा जाता था। गुफा के मुख से जलपक्षी निकलते देख वानरों को भीतर पानी होने की उम्मीद जगी और वे गुफा में प्रवेश कर गए।

घने अंधेरे को पार करते ही वानर सेना एक अलौकिक दृश्य देखकर स्तब्ध रह गई। बाहर से भयानक दिखने वाली गुफा के भीतर एक स्वर्णिम संसार बसा था। यह दिव्य नगर शिल्पी मय दानव द्वारा निर्मित था, जहां स्वर्ण और रजत के महल, मणियों से लदे वृक्ष और अमृत तुल्य मीठे जल के सरोवर थे।

इसी रमणीक स्थल पर चीर वस्त्र धारण किए, मुख पर ब्रह्मतेज लिए एक तपस्विनी समाधिस्थ थीं। वे महातपस्वी मेरुसावर्णि की पुत्री स्वयंप्रभा थीं, जो अपनी सखी हेमा (अप्सरा) के उपवन की रक्षा करते हुए तपस्या में लीन थीं।

वानरों की स्थिति देखकर स्वयंप्रभा ने उनके आगमन का प्रयोजन पूछा। पवनपुत्र हनुमान जी ने विनम्रतापूर्वक परिचय देते हुए बताया कि वे अयोध्यापति भगवान श्री राम के दूत हैं और रावण द्वारा हरी गईं माता जानकी की खोज में भटककर यहां पहुंचे हैं।

प्रभु श्री राम का नाम सुनते ही स्वयंप्रभा का हृदय भक्तिभाव से भर गया। उन्होंने अत्यंत आदर और प्रेम से पूरी वानर सेना को दिव्य फल और शीतल जल ग्रहण कराकर उनकी भूख और प्यास शांत की।

जब वानरों ने बाहर निकलने का मार्ग पूछा, तो स्वयंप्रभा ने सचेत किया कि यह मय दानव की ऐसी मायावी गुफा है, जहां से कोई भी प्राणी जीवित बाहर नहीं जा सकता। वानर सेना यह जानकर अत्यंत निराश हो गई कि सुग्रीव द्वारा दी गई समय-सीमा भी समाप्त हो रही है।

तब तपस्विनी ने कहा कि वे भगवान श्री राम के कार्य में संलग्न हैं, इसलिए वे अपनी तपोशक्ति से उनकी सहायता करेंगी-

यदि स्वयंप्रभा उस दिन वानरों का मार्गदर्शन और उद्धार न करतीं, तो पूरी वानर सेना उस मायावी ऋक्षबिल में ही फंसी रह जाती।

गुफा से सुरक्षित बाहर निकलने के बाद ही वानर दल की भेंट गिद्धराज जटायु के ज्येष्ठ भ्राता संपाती से हुई। संपाती ने ही अपनी दिव्य दृष्टि से देखकर पहली बार प्रमाणित रूप से बताया कि माता सीता 100 योजन दूर समुद्र पार लंका के अशोक वाटिका में सुरक्षित हैं। इसके बाद ही पवनपुत्र हनुमान जी के समुद्र लांघने और लंका दहन की पृष्ठभूमि तैयार हुई।

यह भी पढ़ें- 100 भाइयों की जली चिता, फिर भी अकेला कैसे बचा रहा धृतराष्ट्र का यह बेटा? जानिए आखिर क्यों छोड़ा था अपने भाइयों का साथ?

खबर शेयर करें:
इस खबर को दोस्तों को भेजें

हेडलाइन और सार के साथ लिंक कॉपी करने के लिए नीचे बटन दबाएं

लेखक:

IND24 न्यूज़ के लिए वरिष्ठ पत्रकार।

सभी खबरें देखें
कॉपी नहीं, शेयर करें!