चातुर्मास में करवट बदलेंगे भगवान विष्णु, बदल जाएगी आपकी किस्मत! जानें 'परिवर्तिनी एकादशी' का रहस्य और शुभ मुहूर्त. . . धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखी जाने वाली परिवर्तिनी एकादशी (जिसे जलझूलनी या वामन एकादशी भी कहा जाता है) का विशेष धार्मिक महत्व है। इस पावन अवसर पर सर्वेश्वर भगवान श्री हरि विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है।पौराणिक शास्त्रों के अनुसार, चातुर्मास की योग निद्रा के दौरान इसी दिन भगवान श्री विष्णु शयन शैय्या पर करवट बदलते हैं। इसी कारण इसे 'परिवर्तिनी एकादशी' कहा जाता है।एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब इसका पारण द्वादशी तिथि के भीतर और शुभ मुहूर्त में किया जाए।(नोट: यह जानकारी सनातन परंपराओं, धार्मिक ग्रंथों और पंचांगीय गणनाओं पर आधारित है।)यह भी पढ़ें- इन 4 राशियों के लिए खुलेंगे धन-दौलत और सफलता के रास्ते! आज एक्टिव हुआ गुरु-चंद्रमा का चमत्कारी योग
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखी जाने वाली परिवर्तिनी एकादशी (जिसे जलझूलनी या वामन एकादशी भी कहा जाता है) का विशेष धार्मिक महत्व है। इस पावन अवसर पर सर्वेश्वर भगवान श्री हरि विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
पौराणिक शास्त्रों के अनुसार, चातुर्मास की योग निद्रा के दौरान इसी दिन भगवान श्री विष्णु शयन शैय्या पर करवट बदलते हैं। इसी कारण इसे 'परिवर्तिनी एकादशी' कहा जाता है।
एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब इसका पारण द्वादशी तिथि के भीतर और शुभ मुहूर्त में किया जाए।
(नोट: यह जानकारी सनातन परंपराओं, धार्मिक ग्रंथों और पंचांगीय गणनाओं पर आधारित है।)
यह भी पढ़ें- इन 4 राशियों के लिए खुलेंगे धन-दौलत और सफलता के रास्ते! आज एक्टिव हुआ गुरु-चंद्रमा का चमत्कारी योग
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*चातुर्मास में करवट बदलेंगे भगवान विष्णु, बदल जाएगी आपकी किस्मत! जानें 'परिवर्तिनी एकादशी' का रहस्य और शुभ मुहूर्त*
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखी जाने वाली परिवर्तिनी एकादशी (जिसे जलझूलनी या वामन एकादशी भी कहा जाता है) का विशेष धार्मिक महत्व है। इस पावन अवसर पर सर्वेश्वर भगवान श्री हरि विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है।पौराणिक शास्त्रों के अनुसार, चातुर्मास की योग निद्रा के दौरान इसी दिन भगवान श्री विष्णु शयन शैय्या पर करवट बदलते हैं। इसी कारण इसे 'परिवर्तिनी एकादशी' कहा जाता है।एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब इसका पारण द्वादशी तिथि के भीतर...
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सौजन्य: *IND 24 न्यूज़*